काव्य मंजूषा

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शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021

तरक्की

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  इंसान तरक्की कर रहा है आधुनिक युग का इंसान खूब तरक्की कर रहा है दिन दुगुनी रात चौगुनी कर रहा है हो भी क्यूँ न! उन्नत प्रौद्योगिकी युग है घ...
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