काव्य मंजूषा

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शुक्रवार, 28 मई 2021

साँसों का पहिया

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  बीती रात एक परिचित की मृत्यु हुई सभी परिजन, मित्र, आस-पड़ोस मोहल्ले वाले शोक में डूब गये,  जो कि स्वाभाविक है मैं भी, जो सख़्त मानता है ख़ुद ...
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