काव्य मंजूषा

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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021

पारस्परिक प्रेम

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  तन यहाँ मन कहाँ-कहाँ प्रेम बिनु पंछी खिड़े जहाँ-तहाँ वो विवाहित या विवाहिता जिसके हिस्से प्रेम नहीं पड़ता बड़े अभागे कहलाते हैं यह और भी हृदय...
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