"हर आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी जिसको भी देखना हो, कई बार देखना" ~ निदा फ़ाज़ली

शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

ख़ुमारी



ख़ुमारी...
ख़ुमारी पुरानी तस्वीरों की
ख़ुमारी पुराने लम्हातों की
ख़ुमारी पुराने रिश्तों की
ख़ुमारी पुराने जज़्बातों की
ये ख़ुमारी अच्छी है
तब तक जब तक 
किसी बीमारी में न तबदील हो जाये

ख़ुमारी में रहो इस वक़्त की
ख़ुमारी में रहो मुसाफ़िर-ए-सम्त की
ख़ुमारी में रहो अपनों के उल्फ़त की
ख़ुमारी में रहो बू-ए-मोहब्बत की
इस ख़ुमारी में डूबे रहो 
तब तक जब तक
ये ज़िन्दगी ख़ुदा के हाथों ज़ब्त न हो जाये 

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